1/15/2011

संगत संगीत

राई कूडर ने क्यूबा के उन संगीतकारों को , जो फिदेल की क्यूबा में गुमनामी के गर्त में खो गये थे, रिसरेक्ट किया है फिल्म् बूयेना विस्ता सोशल क्लब में .. कॉम्पे सेगुंडो, इब्राहिम फेरर, रूबेन गोंज़ालेज़, एलियाडे ओचोबा, ओमारा पोर्तुओन्दो .. लिस्ट लम्बी है और उनका संगीत अचंभित कर देने वाला ..
कहते हैं हवाना में संगीत मनोरंजन नहीं है , ये जीने का तरीका है
बूयेना विस्ता हवाना का वो प्रसिद्ध लोकप्रिय क्लब था जहाँ चालीस के दशक में दिग्गज संगीतकारों का जमघट लगता था । लगभग पचास वर्ष बाद क्लब बंद हुआ । विम वेंडर्स और राई कूडर ने उस गुज़रे ज़माने को इस फिल्म में उसी उल्लास से कैद किया है । पारंपरिक क्यूबन और लातिन अमरीकी संगीत का जादू हवाना की सड़कों और मकानों से होता घरों के भीतर से गुज़रता इन संगीतकारों की ज़बानी अपनी सहज कहानी कहता , संगीत की धूप खिली रंगत की खुशी से नहाता सराबोर करता है ।
घनी आबादी वाले हवाना के मरियानो इलाके में सिर्फ सदस्यों के लिये बना था ये सोशल क्लब । फिल्म की शुरुआत में राई कूडर और कॉम्पे सेगुंडो फिल्म के क्रू के साथ जब स्थानीय लोगों से क्लब का लोकेशन पूछते हैं तो किसी को मालूम नहीं निश्चित कहाँ था क्लब। ऐसे समय में जब अफ्रोक्यूबंस के खिलाफ नस्लीय भेदभाव संस्थागत था उस समय ऐसे क्लब किसी सामुदायिक गिल्ड की तर्ज़ पर या जिसे वहाँ कबिल्दो कहते थे , लोगों के एकसाथ मिल बैठने के अड्डे थे ।
रूबेन गोंज़ालेज़ जो क्लब में तीस और चालीस के दशक में पियानो बजाते थे , चालीस के दशक का वर्णन करते कहते हैं
  "an era of real musical life in Cuba, where there was very little money to earn, but everyone played because they really wanted to".
ये वही समय था जब जैज़ से प्रभावित संगीत माम्बो , चरांगा और पचाँगा और चा चा जैसी नृत्य शैलियों का विकास हुआ । एक तरीके से ऐफ्रो-क्यूबन संगीत शैली जैसे रँबा और सोन का निरंतर विकास होता रहा । आर्सेनियो रॉड्रीगेज़ ने एक नये इंस्ट्रूमेंट की मदद से इस संगीत को तब्दील किया सोन मोंतुनो में , जिसे क्यूबन संगीत का आधार कहा जाता है और जिसका बहुत गहरा प्रभाव बीसवीं सदी की न सिर्फ लातिन अमरीकी बल्कि अमरीका के संगीत पर भी पड़ा । सोन क्यूबन लोकप्रिय संगीत का एक ज़ानर है जिसमें स्पैनिश गिटार और अफ्रीकी बांटू रिद्म और परकशन के तत्व हैं ।
खैर , राई कूडर ने इस अल्बम को मात्र छह दिन में रिकार्ड किया और इसमें चौदह ट्रैक्स थे , चैन चैन से लेकर आखिर में ला बायेमेसा और बाद में विम वेंडर्स के साथ मिलकर ड्क्यूमेंटरी बनाई जो कि खुद् उनके अनुसार
"It felt like it was a true character piece"
अच्छे संगीत और बच्चे सी सहजता और भोलेपन वाली खुशी के साथ इन संगीतकारों को गाते बजाते देखना चाहे वो अम्स्टरडम हो या न्यूयॉर्क , हर बार ऐसा ही लगता है जैसे अपने मुहल्ले के आत्मीय संसार में अपने में लीन वो संगीत रच रहे हैं और इस सिलसिले में अगर कुछ लोग वहाँ जुट कर आपके संगीत को सराह दें , बस इससे ज़्यादा और खुशी क्या चाहिये ।
संगीत का मीठा नशीला खुमार जो किसी भी सर्द दिन में हमारी छाती में धूप भर दे जैसे ये  चैन चैन

1/11/2011

कारामेल

नदीन लबाकी की फिल्म कारामेल शुरु होती है सुनहरी रंगत के फ्रेम्स से जहाँ औरतें कारामेल बना रही हैं ..चीनी , नीबू का रस और पानी । चीनी की रंगत पक कर गाढ़ी सुनहरी होती है , चाशनी का तार उँगलियों से होंठों तक मादक नशे में जैसे झूमता डोलता है । कैमरा सेंसुअसली घूमता है कारामेल,औरतों की उँगलियों और उनके हँसते होंठों और मादक आँखों पर । किसी उदास ठंडे दिन में धूप की खुशबू बिखेरता कैमरा सलों से निकलता गलियों से गुज़रता वापस लौटता है पार्लर में जहाँ से पाँच औरतों की कहानी साथ साथ अनफोल्ड होती है । लायेल जो एक शादी शुदा मर्द से कहीं न जाने वाले संबंध की ज़िल्लत झेल रही है ,निसरीन जिसकी शादी होने वाली है पर पारंपरिक समाज की मान्याताओं के अनुरूप विवाह की रात उसकी समस्या अपने को कुँवारी साबित करने की है ,रीमा जो पार्लर में आने वाली एक औरत से आकर्षित है और जमाले जिसका पति उसे छोड़ गया है और जो अपने बढ़ते उम्र और घटते रूप की त्रासदी से रूबरू हो रही है । सलों के बगल दर्ज़ी की दुकान पर अधेड़ रोज़ है जो अपनी विक्षिप्त बहन लिली की देखभाल करते उम्र गुज़ार रही है ।

ये औरतें प्यार , संगत , खुशी तलाशती औरते हैं  , उनके रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनकी तकलीफ दिखती है , उनकी लड़ाई , और उनकी हँसी दिखती है । बेरूत की गलियाँ युद्ध ध्वस्त गलियाँ नहीं , बल्कि धूप नहाई , तरल लोक की सपनीली दुनिया है । कैमरा मोहब्बत से औरतों के खूबसूरत चेहरे को पैन करता है , उनके अंतरंग भावलोक को छूता , खोजता तलाशता दिखाता है उसी कोमलता नरमियत और दुलार से जैसे कि कोई आशिक । लायेल और रोज़ के चेहरे पर तरल उदासी का संसार है , लिली का विक्षिप्त संसार भी दिल तोड़ देने की कोमल चोटखाई दुनिया है । इन सब तकलीफों के बावज़ूद , इन औरतों का एक दूसरे की संगत की चहकती दुनिया , सलों में श्रृंगार के सेंसुअस विज़ुअल्स , बेरूत की संकरी तंग गलियाँ , घरों के भीतर का पारिवारिक सौहाद्र  और ख़ालेद मुज़्ज़न्नर का संगीत  , सब मिलाकर एक ऐसे शुष्क अतर की सुवास बिखेरते हैं , उनकी रंगत इतनी तरल है कि सब एक रिद्म एक ताल में बहता है।
फिल्म किसी भी पॉलिटिकल कॉंटेक्स्ट के परे औरतों के उस संसार की तह खोलता है , जो लगभग दुनिया के किसी भी भूगोल की हो सकती हैं । औरतें जो नफीस खूबसूरती की मलिका हैं , औरतें जो अपने पूरी जादूगरी में औरते हैं , जो किसी का भी दिमाग उड़ा दें , बस इसलिये कि वो हैं , अपनी समूचे मन की और शरीर की और भाव की खूबसूरती में...
 तो जैसा लबाकी , जिन्होंने फिल्म का निर्देशन किया है और लायेल का रोल भी , कहती हैं ,
“sweet and salt, sugary and sour, of the delicious sugar that can burn and hurt you,"
कारामेल यही है और बहुत कुछ और भी है । औरतों की खट्टे मीठे संसार में एक खुली खिड़की ,उनके अपने अस्तित्व ,अपनी ज़िंदगी को डिगनिटी ग्रेस और दिलदारी से जी लेने का मीठा याथार्थ । 

1/08/2011

The onion tales

 लेफ्टिनेंट मिलो माईंडर बाईंडर जोसेफ हेलर की किताब कैच 22 का एक काल्पनिक चरित्र है। योसारियन के स्क्वाड्रन के मेस अधिकारी के रूप में वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक युद्ध मुनाफाखोर है शायद अमेरिकी साहित्य का  सबसे अच्छा काल्पनिक मुनाफाखोर ।
फौज़ की नौकरी करते हुये वह एक उद्यम शुरु करता है एम एंड एम एनटरप्राईज़ । ब्लैक मार्केट के ज़रिये से वह् चीज़ें खरीदता बेचता है और अंतत: जर्मनी के लिये भी काम करना शुरु करते हुये पियानोसा में अपने ही स्क्वाड्रन पर बमबारी करवाता है ।
खैर , शुरुआत में वह ये काम अपने मेस के लिये ताज़े अंडों की खरीद से करता है जिन्हें वह सिसिली में एक सेंट पर खरीदता है , माल्टा में उन्हीं अंडों को साढ़े चार सेंट पर बेचता है , वापस उन्हें सात सेंट पर खरीदता और आखिर में उन्हीं अंडों को स्क्वाड्रन मेस को पाँच सेंट पर बेच देता है । ऐसा करते उसका सिडिकेट एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह् बन जाता है और मिलो पालेर्मो का मेयर , माल्टा का असिस्टेंट गवर्नर , ओरान का शाह , बगदाद का खलीफा , काहिरा का मेयर और कई बुतपरस्त अफ्रीकी देशों में मकई , चावल और बारिश का देवता बन जाता है ।