दीपक कहे
जगमगाये जग
मेरे ही संग
कैसी लगन
जलता रहा दीप
अँधेरा डरा
तेरा चेहरा
फुलझडी सी हँसी
रौशन जहाँ
घर आंगन
जुगनू से चमके
आज दीवाली
मुट्ठी भर
बिखेर दिये तारे
धरती पर
नैन चमके
दीये की रौशनी से
यही है खुशी
आज बिराजे
श्री लक्ष्मी औ गणेश
घर घर में
रंगोली सजी
जोत कलश जला
दीवाली मनी
बस मायूसी ग़ायब है
2 months ago