2/29/2008

विरोध करें बैन नहीं

किसी ब्लॉग का कंटेंट मुझे पसंद न आये तो मैं क्या करूँ ....

फ्लैग कर दूँ?...
अपने ब्लॉग पर विरोध दर्ज़ करूँ और उम्मीद करूँ कि लोग मेरी बात से सहमति प्रगट करें ?
ब्लॉग बैन करने की करवाने की कोशिश करूँ?
उस ब्लॉग को नज़र अंदाज़ करूँ?...

ब्लॉग पब्लिक डोमेन है । इनकी गलियाँ अगर मुझे नहीं भाती मैं वहाँ नहीं जाऊँगी। अगर मेरे घर में कोई गन्दगी फेंकता है मैं चुपचाप उसे कूडे में डालूँगी , लोगों को बुलाकर उसका प्रदर्शन नहीं करूँगी। लेकिन अगर सार्वजनिक तौर पर कोई गाली दे तब? मैं विरोध करूँगी । अभद्र भाषा का प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं। लेकिन बैन भी उचित नहीं। जब संजय बेंगाणी और बाज़ार का मसला हुआ था तब और इस मसले में सिर्फ डिग्रीज़ का ही फर्क है लेकिन किसी के भी बुरा लगने की हद की रेखा अलग हो सकती है। तब जो सही था .. बैन न करना वही आज सही कैसे हो सकता है। भड़ास ने जो किया उसका सिर्फ एक जवाब है ..वहाँ न जाना । किसी इशू को नॉन इशू बना देने का सबसे सही तरीका है उसके असर को खत्म करने के लिये खास तब जब अगला ऐसी भाषा और नीयत पर उतर आये जिसमें गंदगी के अलावा कोई और तर्क न हो। उसी लेवल पर गिरना उसके जैसे ही बनना है और कोई और तरीका सिर्फ भड़ास को हाईलाईट ही कर रहा है।

फिर क्या ? चुपचाप फ्लैग करें । वैसे ये भी किसी तरीके के ब्लॉग होलोकौस्ट जैसा हो जायेगा। मेरे गुट ने आपको फ्लैग किया और आपके ने मुझे। अंतत एग्रीगेटर्स पर कोई ब्लॉग नहीं बचा .. ऐसा बचकाना खेल क्या साबित कर देगा। कोई रिस्पोंसिबल बिहेवियर की परिभाषा तो नहीं ही लिख देगा । शायद फिर एक ही रास्ता बचता है .. अपने ब्लॉग पर विरोध दर्ज़ कीजिये .. आपकी बात सही है तो समर्थन खुद बखुद मिलेगा , मिलना चाहिये ( ये उम्मीद कि लोग फेंससिटर्ज़ नहीं हैं , विज़डम वाले लोग हैं .. बार बार इसके ओपोसिट साबित होने के बावज़ूद उम्मीद अब भी बरकरार है)

और जैसा यशवंत ने लिखा ..किसको- किसको बैन करेंगे ? ऐसे ब्लॉग हाईड्रा ब्लॉग्स हैं , किसी और नाम से उग आयेंगे। आज कम संख्या में हैं .. आपकी नज़र पड़ती है ..कल इतने होंगे कि आपका ध्यान तक न जायेंगा .. फिर किसको बैन करेंगे .. कोई अगर सार्वजनिक टॉयलेट बनना चाहता है .. बनने दें .. टॉयलेट दीवार पर लिखी भद्दी अश्लील ग्राफिटी बनना चाहता है .. बनने दें .. ये उनकी मानसिक दशा दर्शाता है ..हमारी नहीं । हमारी इच्छा कुछ बढ़िया सार्थक पढ़ने की है तो हम वैसी जगह जायें जहाँ ये मिलें , किन्हीं और जगहों से क्या वास्ता ? नालियों की तरफ नाक बन्द कर निकल लें.. लेकिन एक संयत विरोध दर्ज़ करने के बाद।

विरोध करें बैन नहीं। मनीषा और मसिजीवी के साथ इस विरोध में हम सब साथ हैं।

15 comments:

रचना said...

you are right pratyakha i am also with manisha but why was yashwant invited to write on chokher bali when everyone knows what he writes
i think choker bali is more respponsible for all the mess created rather then bhadaas/yashwant.
soemwhere we all should own our responsiblity towards each other . we cant make one rule and then break it . i and swapndarshi protested then also but yashwant was chosen by choker bali in place of us . we are paying the price of calling a demon to our home . and lets not say we did not realise this would happen . this was bound to happen and it happend

ajay kumar jha said...

pratyakshaa jee,
mujhe ye samajh nahin aa rahaa hai ki blogging kee dishaa kidhar jaa rahee hai, waise aapne sahee naseehat de dee hai. yun bhee bahas yadi swasth roop mein ho to hee uskee saarthaktaa banee rehtee hai.

Anonymous said...

प्रत्‍यक्षा जी आपकी कुछ बातें सही हैं। ये ही यशवं‍त सिंह स्‍टार न्‍यूज के सीनियर पत्रकार विनोद कापड़ी से भिड़ गए और उल्‍टा पुल्‍टा कहा था जिसने इनकी बात टेप कर जागरण अखबार के मालिकों को सुना दी जिसकी वजह से यशवंत को वहां से रवाना कर दिया गया। यह बात यशवंत जी जगजाहिर क्‍यों नहीं करते कि वे अपनी वाणी के साथ साथ दिमाग में भी कूडा रखते हैं।

kanchan said...

ham jis manch par hai vo vicharo.n ka manch hai.... vah.n apni baat ko kahne ka...apni baat manvane ka ek shalin tarika hona chahiye.. au ham hi sahi hai.n dusara hi galat hai is se thora alag soch karni hi padegi... baat bilkul saaf si hai 10 tarah ki films aati hai comedy, periodic, romantic, family...hame jo pasand ho ham us film ko dekhe.n dusro.n ko avoid hi karna shreyaskar hai...

bahut achhhhe vichar..!

सुजाता said...

प्रत्यक्षा
आपकी बात बिलकुल सही है ।शत प्रतिशत सहमत ।हमारा विरोध केवल भडास के कुछ कर्मो के प्रति है । उसे हटाया जाये इससे हमारा सरोकार कतई नही ।

Sanjeet Tripathi said...

बहुत संयत और सही बात लिखी है आपने!!

Beji said...

विरोध करें, इग्नोर करें....बैन नहीं....

सहमत

Parul said...

IRFAAN ke blog par ki gayi apni tippadi ..yahan bhi post kar rahi huun......

gaaliyon se bharey blogs kholney me bhi badi sharmindagi mehsuus hoti hai......vaisey ravi ji ki baat se sehmat huun ki in blogs ko andekhaa kiya jaanaa chahiye

Jitendra Chaudhary said...

बहुत ढंग से आपने अपनी बात रखी। एकदम सही कहा है आपने, आप एक बैन करोगे, दूसरे उग आएंगे, लोग हिट्स पाने के लिए कुछ भी करेंगे। लेकिन इन सबसे निबटना तो पड़ेगा ही, विरोध के तरीके कई हो सकते है,लेकिन बैन करना गलत होगा। दरअसल बैन करना सम्भव ही नही। एग्रीगेटर बैन कर देंगे, फिर भी ब्लॉग तो रहेगा ही। ब्लॉग्स्पाट बैन कर देगा, शायद हटा भी देगा लेकिन इन्टरनैट के आर्काइव्स मे तो रहेगा ही। सही तरीका है, ऐसे ब्लॉग्स को अलग थलग कर देना, सामूहिक विरोध करना, हिट्स के लिए तरसा देना। जहाँ इनको हिट्स/भाव मिलना कम हो जाएगा, ये लोग लाइन पर आ जाएंगे। अगर नही भी आए, तो अकेले लिखेंगे और अकेले पढेंगे।

अजित वडनेरकर said...

अच्छी बात। रचना की बात भी सही है। मुझे भी उस मुद्दे पर आज तक ताज्जुब है अलबत्ता सुजाता से कभी पूछा नहीं।

Pramod Singh said...

thank u, rachna... and thank u, beji!

Pramod Singh said...

@pratyaksha,
और सही मात्रा में खरा-खरा सोच पाने, उसे सामने रखने के लिए आपका भी शुक्रिया..

अनूप भार्गव said...

९०% (या कहो ९५%) सहमत

रवीन्द्र रंजन said...

बहुत ही सही बात कही है आपने। मैं आपकी बात से शत-प्रतिशत सहमत हूं।

अर्कजेश *Arkjesh* said...

achanak idhar aaya to aapaka post dekha. mujhe hindi blogging men abhi 1 maheena hi hua hai. shuru men aapaka blog dekha tha.

kya jhagada hai mujhe nahin maloom lekin aapaki baat se sahamat hun.

blogger's publicty ke liye kanhan tak chale jaayenge isaka andaja lgana mushikl hai.

kuch bhi ho lekin abhivyakti ki ek maryada to honi hi chahiye.
bhai log gali galuj par utar aate hain.

inako deal karane ka sabase achha tareeka hai ki inako ignor kar deejiye.