3/01/2008

अनदर मिलियंथ टाईम ?

मिस्टर स्पॉक पढ़ पढ़कर सब कंठस्थ हो गया था फिर भी बउआ के नवजात मसले फूल से गाल और चमकीले रेशम बाल को देख मन आह्लाद और आशंका से भर जाता। उसकी बँधी मुट्ठियों में अपनी कानी उँगली पकड़ा देने का सुख जैसे अब जाकर मन कहीं ठहर गया हो। अ शिप इन ऐंकर !

जब पैदा होता था डॉक्टर मुकर्जी ने कहा था , बेटा हुआ है। मन बेटी के लिये हुमसता था। तीसरे महीने से ही विंडो शॉप्स में लटके फ्रॉक पर मन अटक जाता। पोल्का डॉट्स के गुलाबी झबले,कढ़ाई वाले आसमानी स्मॉक्स , स्मोकिंग वाले पीले रैप्स , लेस वाली बूटी , कैप्स अल्ल्म गल्ल्म। अब डॉक्टर कहती हैं बेटा हुआ है। स्पाईनल अनसथीसीया के खुमार में मैं पूछती हूँ बेवकूफाना सवाल , आर यू श्योर ? खडूस स्पिंस्टर डॉक्टर कड़ी होकर कहती है , ऐज़ श्योर अज़ आई कैन एवर बी। फिर रुखाई के कॉम्पेनसेशन में मेरे गाल थपथपा कर मुस्कुराती है , योर बेबी इज़ डूइंग फाईन। हाँ डूईंग फाईन , सच ! ऐसी बुलंद रुलाई ।

एड़ियों से उलटा लटके गोल गाल चेहरा भींचे मुट्ठी बाँधे लाल रुलाई । कितना प्रोटेस्ट दुनिया में आने का। नर्स तुरत बच्चे को ले जाती है। मैं रिलैक्स करती हूँ , मन भी शाँत। सब टेंशन खत्म। कुछ अनीसथीसिया का कमाल है , हैलूसिनेट करती हूँ , रंग बिरंगे वृत हवा में तैर रहे हैं। मैं हल्की सब हल्का मधुर। कैसा अजब खुमार। लूसी इन द स्काई विद डायमंड्स।

सफेद कपड़े में लिपटे गुलाबी गोल चेहरे के गाल को आहिस्ता एक उँगली से छूती हूँ। बेबी टुकुर टुकुर देखता है, फिर छोटा नन्हा मुँह खोल जम्हाई लेता है। कनपटी पर , माथे पर चमकते रेशम की रेखा है। अ ब्रूईज़्ड फ्लावर। मेरी छाती दरकती है। फिर मैं टूटती जाती हूँ किसी अनाम रुलाई के वेग से पूरा बदन हिलता है। कनपटी से अनवरत बहते आँसूओं को देख कर नर्स घबड़ा कर पूछती है, ज़्यादा तकलीफ होता क्या? इक्कीस बाईस साल की नई ट्रेनी नर्स है। क्या समझेगी माँ बनना क्या होता है। अब मैं मुस्कुराती हूँ। मैं , चौबीस साल की ताज़ा नवेली माँ , अचानक बड़ी समझदार दुनियादार हो जाती हूँ , अपनी नयी पदवी के भार से अचंभित आह्लादित। छाती का भार कैसा सुखद भार है। बउआ के होंठों के कोर से दूध की एक बून्द थरथरा कर लटकी है। नवजात की मीठी खुशबू , बेबी पाउडर की गमक , दूध की सोंधी महक से तरबतर.. नींद में दो बार उसके होंठ चलते हैं, आँखों की पुतलियाँ बेचैन पोपटों के नीचे थरथरा कर स्थिर होती हैं और कोई दिव्य मुस्कुराहट सी चेहरे पर पसर जाती है। मेरा दिल भर आता है। इस नये प्राणी को इस धरती पर लाने का चमत्कार।

कलाई में नस में धँसे आई वी की सूई , अनीसथीसिया के असर से तीखी उबकाई , सीज़ेरियन के कटाव का टभकता पोर पोर दुखाता घाव, पपड़ियाये होंठों और मोटे हुये जीभ की मोटी धँसी बेचैनी.. सब तिरोहित हो जाता है।ऊपर धीमे घूमते पँखे के डैनों में , बाहर गंगा किनारे पेड़ों पर चहचहाती चिड़ियों के शोर में , अपने बगल में सोये इस नवजात में जीवन का क्रम एकबार और अपना पार्ट खेलता है।


कहीं दूर कोई मुस्कुराता है .. खेल का नया सीन अनफोल्ड होगा , नये पात्र नयी कहानी ..देखें इस बार क्या मोड़ लेगा ये खेल , कुछ नया सुहाना अप्रत्याशित ? ठुड्डी पर उँगली टिकाये इंतज़ार करता है ... अनदर मिलियंथ टाईम?

8 comments:

arvind mishra said...

ऐसी भावप्रवणता कि भई वाह ,शब्दों का जादू या जादू भरे शब्द !

Lavanyam - Antarman said...

हाँ प्रत्यक्षा यही तो जीवन चक्र है -

नव जीवन , प्रथम सोपान, आत्मा का अवतरण !

Suitur said...

बधाई हो ....

जोशिम said...

"..बँधी मुट्ठियों में अपनी कानी उँगली पकड़ा देने का सुख.." और पेट पर उल्टा सुलाने का भी - बेहतरीन लिखा - rgds

silbil said...

Badi acchi post hai...
except ek phrase ke...
KHADOOS SPINSITER...really?
jin ladkiyon ki shaadi nahin hoti ya unhone khud apni marzi se ki nahin hoti woh khadoos hoti hain...

mujhe pata hai ab aap kahengi yeh doctor unmarried bhi thi aur khadoos bhi to kya farq padta hai...shayad aap ke liye koi nahin...
par zara bataiye aapne kisi khadoos aadmi to dekh kar kab last time ye socha tha ki woh unmarried hoga, therefore sexually deprived and therefore khadoos...
aise hi poonch rahi hoon...

aapki bahut si posts padh ke aap sorted lagi isiliye...

cheers

अजित वडनेरकर said...

बहुत सुंदर ...

Pratyaksha said...

सिलबिल ..खडूस, स्पिंस्टर होने की वजह से ? अहा ! ऐसा तो मैंने नहीं लिखा , लेकिन आपने ऐसा समझा । क्यों ? कुछ प्रीकंसीव्ड इमेजेस हैं इसलिये? यकीन मानिये मेरी दुनिया में कोई भी खड़ूस हो सकता है .. औरत , मर्द .. अकेला , दुकेला कोई भी ...

silbil said...

Mujhe pata tha aap meri baat ko galat tareeke se nahin logi.
MUjhe yeh bhi idea tha ki aap spinsters ko hi khadoos maanti hogi...par yeh ek stereotype hai jo baaki sterotypes ki tarah dangerous bhi hai aur ek underlying social bias ki taraf ishaara bhi karta hai...isliye maine socha point kar doon...

aapne kabhi shrewish bachelor suna hai ya frustrated bachelors par old maid=spinster=frustrated woman with no life...