8/25/2009

बरसात की एक रात ..द स्टेज इज़ सेट फॉर द क्राइम

कुहासा झम झम गिर रहा था । जाड़े के सर्द दिनों में बारिश का तीसरा अवसाद भरा दिन था । दिन के बाद रात अचक्के नकाबपोश सी आई थी। सड़क वीरान थी। घरों की खिड़कियाँ बन्द थीं , पर्दे गिरे थे । अँधेरे में लैम्पपोस्ट से लटका एक पीला फीका गोला धीरे धीरे हिल रहा था । बारिश झीसियों में किसी पुराने रुदन की धीमी अंतहीन सुबकियों सी गिरती थी । सब रहस्यमय रोमाँचक था , जैसे पुरानी थ्रिलर फिल्मों में किसी अनहोनी घटना के घट जाने का स्टेज सेट हो , किसी लम्बी खींची तान के दहशतपने को उकेरता वायलिन का सुर हो।

ट्रेंचकोट और फेल्ट हैट पहने लम्बा सा शख्स तेज़ कदमों से चलता आया फिर ठिठक कर लैम्प पोस्ट के ऐन नीचे खड़ा हुआ । ऊपर से गिरती रौशनी में हैट के नीचे सिर्फ उसके चेहरे का निचला हिस्सा दिखता था । मज़बूत जबड़े और शायद बाज़ की सी मुड़ी हुई कठोर सी नाक का आभास । वो कुछ देर अँधेरे में जाने क्या देखता खड़ा रहा फिर कोट के भीतरी पॉकेट से निकाल , हथेलियों की ओट में, पानी और हवा से लौ बचाते, तल्लीन होकर सिगरेट सुलगाया । एक पल को भक्क से लौ की तेज़ी भड़की फिर एक लाल बिन्दू में तब्दील हो गई । गहरा कश खींचते उसने कँधे सिकोड़े फिर कोट के कॉलर को खड़ा करते , गर्दन को तीखी हवा और पानी से बचाते तीन चार तेज़ कश खींचे । फिर आधे सिगरेट को बिना पिये ही अचानक किसी बेताबी से नीचे फेंका , बूट के टो से उसे मसला , कोट के पॉकेट में हाथ ठूँसे और जिस तेज़ी से आया था उसी तेज़ी से मुड़ कर अँधेरे किसी रास्ते में विलीन हो गया । उसके सशरीर चले जाने के कुछ देर बाद तक उसके बूट की आवाज़ एक फौज़ी दुरुस्ती में गूँजती रही ।

ऊपर एक खिड़की खुली । एक औरत ने पर्दे हटाते नीचे झाँका , आवाज़ की ओर । कुछ देर सतर्क चौकन्नेपन के टेढ़ेपने में सर बाहर निकाले अँधेरा पीती रही । फिर हताश खिड़की बन्द की । किसी गली में छत से निकले ड्रेन पाइप से हड़हड़ाते पानी का शोर हुआ फिर सब एकदम शाँत हो गया । आग से हाथ सेंकते बूढ़े आदमी ने बेचैन टहलती औरत को देखा । इस छोटे से कमरे में उसका यों टहलकदमी करना उसे परेशान कर रहा था । घर के अंदर यों लगातार बन्द होना भी , और इतनी ठंड में मनपसंद शराब का न होना भी ।

बगल के फ्लैट से , जहाँ वो पीली जांडिस वाली लड़की अकेली रहती थी , संगीत की धीमी सुबकती आवाज़ आने लगी । इन लगातार की बरसाती सर्द दिनों में लड़की का चेलो बजाना बेतरह बढ़ जाता था । सूखते काँपते पत्तों की तरह उसका संगीत फिज़ाओं में थरथराता गूँजता था । बारिश की संगत में हुहुआती बर्फीली हवाओं पर सवार छतों की काई पर जम जाता , स्यामीज़ बिल्ली की गुपचुप चाप पर घूमता उसकी सीधी तनी खड़ी पूँछ के शिखर पर टिक जाता , फायरप्लेस की लकड़ियों पर तड़तड़ाता , पड़ोस के घरों की खिड़कियों पर टपटप दस्तक देता , फिर वापस घूमता लड़की के चेलो बजाते हाथों में समा जाता । उसकी उँगलियाँ कुछ पल को थरथरातीं , उसके होंठ उदासी में नीचे गिर जाते । खिड़की के सिल पर रखे पौधे का अकेला फूल धीमे से मुरझा जाता ।

बिल्ली भीगते दीवार पर कदम जमाये चलती , चौंक कर पीछे पेड़ों पर कुछ देखती । उसकी पूँछ तन जाती , उसके रोंये खड़े हो जाते , उसका बदन अकड़ जाता । पेड़ों के झुरमुट के पीछे ट्रेंचकोट वाला शख्स लम्बे डग भरता , पानी के बौछार के आगे ज़रा सा झुकता , तेज़ी से जाता अचानक मुड़ कर बिल्ली को देखता है ।

द स्टेज इज़ सेट फॉर द क्राइम ...

( जारी.... )

21 comments:

Mithilesh dubey said...

बहुत खुब.........

काव्या शुक्ला said...

Laga koi film chal rahee ho.
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

कुश said...

वाकई पढ़ते हुए सारे दृश्य सजीव से लग रहे है.. मानो कोई फिल्म चल रही हो..

neera said...

The crime sings, breath and live...

अनिल कान्त : said...

आपने बाँध कर रख लिया...खासकर शब्द संयोजन बेहतरीन...आगे का इंतजार है

pragya said...

bhayavahata ka srijan hua

Anonymous said...

kya us aurat ka khoon hone wala hai??
kay wo hat wala aadmi khooni hai??kya wah aurat akeli rehti hai,ya shadi shuda hai aur uska pati be-wafa hai??ya uska koi xtra marital affair hai??ya is sab ke peeche paise-jay-daad ka masla hai??kya wo aurat kisi ki kept-women hai aur wah aadmi bahut paise wala hai aur ab uska khaatma chahata hai?kya wo buda bhikari sachmuch me koi bhikari hai ,ya koi khabri hai??wo baju me jondis wali ladki kya aage chalkar kisi cheekh ki gawah banegi?? ya ,uski peeli aankhe laal rang ka khoon ya kuch aur dekh lengi??ya uske music me woh cheekh bhi dab jayegi?wo bhikari sirf us aadmi ko buiulding me jaate hue hi dekh paayega ya kheedki me se shadow view me gala dabta hua bhi dekhega??ya phir wo hat wala aadmi kahi us jondis wali ladki ko to nahi maar dega??ya phir wo be-chain aurat kai us ladki ko to nahi marne wali hai??ya phir ek aur naye kirdaar ki entry to nahi hone wali hai??us hat wale ko kisne bheja hai??wo kaun hai??......itne saare sawal...jawaab sirf ek...PRATYAKSHA JI.

P.S.she wouldn't have cared a damn...but few readers do.

Pratyaksha said...

@anonymous .. it is not fair really to subvert my plot like this :-)

why don't you write the next part ..you seem to know all the answers. I wish I had left the word 'crime' unwritten (sigh)

Pratyaksha said...

mithilesh, kavya, kush,neera , anil , pragya .. bahut shukriya .. stage to set kiya thha .. ab dekhiye aage hota hai kya

SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION said...

वाह जी वाह अच्छी फिल्म दिखा दी आपने।



आभार

हे! प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई-टाईगर

Anonymous said...

'crime'-so far-is not my cup of tea,i connect to more of 'CHAAYA-VAADI' stuff.I have a friendly suggestion lets give YOUR story an alias name also-'SOCH NA THA'.Wherein pratyakshaji will come up with many twists in the story which none of the readers can anticipate.Provided you hav picked up on crime thing seriously,becoz how i see pratyaksha ji writing crime is -'thoughts on holiday'or'change of work(thinking)is rest'.
regards,
P.S.she wouldn't hav cared a damn...but few readers do.

डॉ .अनुराग said...

पिछले ढेड घंटे से बारिश है...बती गुल है .इनवर्टर पे आपका स्टेज देख रहा हूँ....वेल क्राफ्टेड है.....

Anonymous said...

I am sorry..if i hav hurt the process.
P.S.she woudn't hav cared a damn...........

creativekona said...

प्रत्यक्षा जी ,
आपके शब्द चित्रों को पढ़ना---मात्र फ़िल्म देखने जैसा
ही नहीं--बल्कि फ़िल्म् के हर फ़्रेम से खुद को गुजारना है…॥शुभकामनायें।
हेमन्त कुमार

Apoorv said...

अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार है

crazy devil said...

nice one..am waiting for the remaining part

crazy devil said...

nice one..am waiting for the remaining part

IMCurtain said...

Lovely post! Dropping by...

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Anonymous said...

Pratyaksha ji,is kahani ka dusra bhaag kab padh payenge??it feels now....you set the stage for CRIME..and I did it.
regards,
P.S.she wouldn't have cared a damn...but few fans do !!

Pratyaksha said...

@anonymous... no crime on your part only laziness at mine

but why you are anonymous ? mystery ?

Rahul Singh said...

अपनी टिप्‍पणी यहां प्रकाशित न पा कर दुहरा रहा हूं- कहा जाता है कि आप कहीं जा रहे हों और रास्‍ते में बिल्‍ली आ जाए तो इसका मतलब क्‍या होता है, simple मतलब बिल्‍ली भी कहीं जा रही है.