5/19/2008

रेड इज़ डेंजर

उन लड़कियों ने बाथरूम के शीशे तक
रंग डाले थे
चौकोर टुकड़े धानी और नीले
और समन्दर का गहरा हरा नीला पानी
फैले रेत का सुनहरापन और
लहराते नारियल के पेड़
पानी का झाग और
धुँध में धुँधलाता
कोई पानी का जहाज़

फिर वो कमरे की दीवारों तक आईं
वहाँ उन्होंने बनाया
जंगल
घना डरावना नहीं
खुशनुमा सुकूनदेह
जहाँ आसमान से पत्तियों तक
रौशनी छनती थी
ज़मीन पर
छोटे नन्हे फूल खिलते थे

फिर बाहरी कमरों की बारी आई
फिर दरवाज़ों की
जहाँ घुड़सवार सफेद अरबी घोड़ों पर
चुस्त मुस्तैद
परचम लहराते
धूल उड़ाते जाने कहाँ
किस नई दुनिया की खोज में
कूच करते


इस तरह उन लड़कियों ने
पूरा जहान रंग डाला
एक सफर कर डाला
पूरी दुनिया देख डाली


पर उनके रंग
अब भी बाकी थे
कुछ ठहर कर
उन्होंने अब रंगना शुरु किया
अपना मन
और पाया कि
चाहे कितनी मन मर्जी
कूची चला लें
कैसे भी शोख रंग चुन लें
पीले पड़े चेहरों पर
बिना आँख़ नाक होंठ वाले चेहरों पर
वो सिर्फ एक रंग डाल सकीं थी
लाल बिन्दी
सिर्फ बिन्दी
उस पीले चेहरे पर
बस और कुछ नहीं

और अंत में
थकहार कर
उन्होंने लिखा
रेड इज़ डेंजर !
और कहा
ये सफर यहीं समाप्त होता है

10 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

बहुत अच्‍छा प्रत्‍यक्षा जी और आखिरी बात में तो जो बात है वह किसी बात में नहीं बहुत अच्‍छा लगा
लिखते रहो ताकि हम ऐसी ही अच्‍छी अच्‍छी रेड इज डेंजर पढते रहें

vijay gaur said...

अच्छी कविता है.

DR.ANURAG ARYA said...

हमारा लाल सलाम.....

Udan Tashtari said...

बहुत खूब!

Navyavesh Navrahi said...

कमाल है, आप अच्‍छा लिख रही हैं।

Navyavesh Navrahi said...

आपकी रचनाएं अच्‍छी हैं, लिखते रहें।

Lavanyam - Antarman said...

" RED , indeed is Dangerous " ....
.may your imagination always paint such pictures with many hues Pratyaksha -
warm Rgds,
L

गौरव सोलंकी said...

अच्छी लगी...

रजनी भार्गव said...

काल्पनिक संसार में यथार्थ को बहुत खूबसूरती से बुनती हो।

vimal verma said...

सही है...