7/24/2007

पार्क में

लडकी हँस देती है जाने किस बात पर । लडकी हँसती है हमेशा जाने किस बात पर । लडका हैरानी से देखता है उसे । ऐसी तो हँसने वाली कोई बात नहीं कही फिर लडकी हँसी क्यों । जब भी लडकी हँसती है लडका हैरान हो जाता है । मैं कोई जोकर हूँ क्या , कुछ कुछ नाराज़गी से कहता है । लडकी कुछ और हँसती है ,संतरा छीलती है , बिखरे बालों को कानों के पीछे समेटती है । लडका सिर्फ देखता है और सोचता है । लडकी पूछती है ,क्या कर रहे हो ? लडका कहता है , सोच रहा हूँ । लडकी इस बार नहीं हँसती । लडकी इसबार हैरान हो जाती है , मेरे साथ हो फिर भी सोच रहे हो ?

पार्क के ठीक पीछे से ,जहाँ से कीकर के पेडों का जंगल शुरु होता है कोई पुरानी भूली बिसरी , लाखौरी ईंटों की मेहराबदार दीवारों की काई लगी इमारत में बंदरों का एक जोडा खोंकियाता है । अधगिरी टूटी दीवार के सहारे टिका , खादी कुर्ते और नीली जींस में भूरी दाढी वाला वो चित्रकार शायद लडके और लडकी की ही तस्वीर बना रहा हो या फिर क्या पता उसका चित्त बंदरों के जोडे पर जुडा हो । सिगरेट की अनगिनत टोंटियों को एहतियातन समेटता वो मुस्कुराता है । उँगलियों को खोल बन्द करता आँखें मूँद लेता है । लडकी होंठों से उँगलियों के रस को पोछती है । लडके को देख हँस देती है । लडका इसबार हैरान नहीं होता । लडका इसबार सोचता भी नहीं । लडका इसबार लडकी को देखकर सिर्फ हँस देता है ।

18 comments:

RC Mishra said...

क्या हुआ पार्क मे , कुछ समझ नही आया; पर अन्त मे हम भी हंस लिये :)

Pratik said...

सुललित शब्द-चित्र रोचक है। लड़के के मनोभाव से भलीभांति वाकिफ़ हूँ। :)

परमजीत बाली said...
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vimal verma said...

मुझे चिंता हो रही है इन बच्‍चों ने दोपहर का लंच खाया है या नहीं? खाया है?

Udan Tashtari said...

अच्छा शब्द चित्र खींचा है. बढ़िया.

Sanjeeva Tiwari said...

जीवंत चित्र

mamta said...

थोड़ी अधूरी सी लग रही है ।

Vikram Pratap Singh said...

What happened there at park, i m not getting....

Rajesh Roshan said...

शब्द जो चित्र बनाती हो। अच्छा लिखा है

Anonymous said...
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Anil Arya said...

अच्छा है...

Anonymous said...
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अनूप भार्गव said...

फ़िर क्या हुआ ? :-)

Anonymous said...

Madam, kaliyaji ki patrika me aapki kahani kya chhapi aap to unke pad chinhon par chalni lagin. matlab pratikriya ke nam par stuti chhapiye aur aalochna ko raddi ki tokri me daal dijiye.Tabhi to aapne apni aalochna wali tippani remove kar li. rachna karm me aise kam nahi chalta hai.aalochna sun ne ke liye apne kan aur dil dono hamesha taiyar rakhiye warna mithi mithi prashansa sunte rahne se madhumeh ho jayega.

Pratyaksha said...

बेनाम जी ,
अगर अपना मेल आई डी दें तो कोई सार्थक बात हो सकती है । ब्लॉग पर ऐसी बहस का क्या मतलब । आपको मेरा लिखा पसंद नहीं आया ये आपका परसेप्शन है । आपने जताया , आभारी हूँ । लिखने की शुरुआत की है , रास्ते कहाँ और किधर ले जायेंगे ये देखना तो अभी बाकी है । और मधुमेह की स्थिति आने में अभी काफी वक्त लगेगा । आपकी इस चिंता के लिये भी आभार ।

Debashish said...

बेनाम जी, अगर अपना मेल आई डी दें तो कोई सार्थक बात हो सकती है। ब्लॉग पर ऐसी बहस का क्या मतलब।

यहाँ मैं आपसे सहमत नहीं प्रत्यक्षा, अगर असहमती की टिप्पणी अशोभनीय नहीं है तो बहस ब्लॉग पर ही होनी चाहिये ईमेल से नहीं।

पुनीत ओमर said...

बेहद कम शब्दों में लड़कों की मूळ प्रवृत्ति का अच्छा चित्रण..

अनिल कान्त : said...

laga jaise samne hi sab kuchh ho raha ho