2/20/2007

चिट्ठा जगत में ये कैसी महामारी प्रभु

तो आखिर ये मौका मिल ही गया । मेरा शिकार कौन ? तीन दिन से जुगाली चल रही है, किसे पकडूँ , किसे छोडूँ ।

अरे ओ साँभा , कितने आदमी थे ,

तीन कि पाँच ?

पाँच सरदार

सिर्फ पाँच ? बहुत नाईंसाफी है ।

पाँच से ज्यादा होने चाहिये थे। पाँच बात और पाँच शिकार । बहुत नाईंसाफी है ।

रशियन रूले कैसे खेला जाय भई अमित ? पर चलो गंभीर बात पहले । लेकिन उससे पहले ...

पता चला है कि चिट्ठा जगत में छूत की बीमारी फैली है । बडी तेज़ी से फैल रही है ये बीमारी, एक से पाँच , पाँच से पचीस ,पचीस से ,अरे भाई पहले ही बताया था न मेरी गणित कमज़ोर है । जिसे छू दो (माउस के चटके से ) वही महामारी से ग्रसित । तो हम भी इस पुण्य कार्य को आगे बढाते हैं ,शुद्ध भारतीय परंपरा में ,कीटाणु फैलाने के पावन कार्य का श्री ओम गणेशाय नम:

अमित ने टैग किया है । मुझे अपने बारे में पाँच ऐसी बातें बतानी है जो कि लोग नहीं जानते । मतलब कि इतने मेहनत से जो सच आजतक छुपाया था उसे खुद ही जगज़ाहिर कर दूँ ? अब बात तो मेरे हाथ में है कि क्या बताऊँ क्या न बताऊँ । मुझे तो लगता है कि चिट्ठे पर मैंने आप बीती ही ज्यादा लिखी है, लोग सब जानते हैं मेरे बारे में पर फिर भी अब अमित ने एक मौका और दे ही दिया कुछ और आप बीती का तो बिस्मिल्लाह !,

(खुदा को हाज़िर नाज़िर जान कर जो कहूँगी सच ही कहूँगी सच के सिवा और कुछ न कहूँगी )


पहली बात ...जब मैं छोटी थी ( अब बहुत बडी हो गई हूँ ) तो बेहद अंतरमुखी थी ।लोगों से बात करने में हिचकती थी । दस बार सोचना पडता था कुछ बोलने के पहले । किसी से बात करते वक्त लगता था कि वार्तालाप चलता रहे इसका सारा दारोमदार मेरे ही कँधों पर है । तो बात चलती थी और मेरे दिमाग में , आगे क्या टॉपिक हो इसकी घुडदौड चलती थी ।
अब लोगों से बात करना , लोगों को जानना अच्छा लगता है । पुराने दिनों की याद में अब भी दोस्तों को सुनती हूँ , कई कई घँटे । आगे क्या बात चले इसकी टेंशन अब नहीं , चुपचाप सुन सकती हूँ और वक्त पडे तो खूब बोलती हूँ । मेरा दायरा खासा बडा है पर सन्नाटे का सुख अब भी मुट्ठी भर है ।

दूसरी बात ...मैं खूब गुस्सा होती हूँ ,इस पर ,उसपर, सब पर । कई कई दिन गुस्सा रहती हूँ पर अंदर से संतोष की एक नदी बहती रहती है । कई बार सिर्फ जिद्द में गुस्सा रहती हूँ , अपने आप पर हँसी भी आती है बेतरह ।

तीसरी बात ....बहुत बहुत आलसी हूँ । सारा दिन बिस्तर पर किताब पढते बिताई जा सकती है । दिल ढूँढता है फिर वही फुरसत के रात दिन ।

चौथी बात ..... कभी नहीं सोचा था कि चिट्ठा लिखूँगी । मैं अपने को एक बहुत प्रायवेट पर्सन समझती थी । आसानी से नहीं खुलने वाली । चिट्ठाकारी ने ये मुगालता अपने बारे में खत्म कर दिया ।

पाँचवी बात ..मैं बहुत बेसुरा गाती हूँ । गाती ज़रूर हूँ । ऑफिस जाते हुये और शाम को घर लौटते हुये मलिका पुखराज या आबिदा परवीन के साथ सुर मिलाना बहुत अच्छा लगता है । किसी रेडलाईट पर खिडकी के शीशे के पार लोगों को अजीब निगाहों से घूरते हुये पाया है ।(मेरे होंठ उन्हें बेआवाज़ हिलते दिखाई देते होंगे ,सिर किसी अनजानी ताल में हिलता । क्या दृश्य होगा ,आप कल्पना कर सकते हैं ।)


अब आता है जिसे कहते हैं ‘नाइस पार्ट ‘ मतलब शिकार खोजो अभियान । कुछ लोगों को रचना और उन्मुक्त ने पकड लिया । कोई गम नहीं ,इतने चिट्ठाकार हैं ।आँख बन्द कर के भी चूहेराम को चटकाऊँगी तो कोई न कोई शिकार मिल ही जायेगा :-)
गलत मत समझिये , बडी मशक्कत के बाद नाम फाइनल किया है । इंडीब्लॉगीज़ की सूची में आये न आये ,टैग सूची में आये तो सही :-)
( हम तो टैग होने में ही अपनी सफलता मानते हैं , बाकी आप पर है आप क्या मानते हैं )

शिकार नम्बर 1 ई-पंडित ( हो जाये कुछ हरियाणवी स्टाइल )
शिकार नम्बर 2 आशीष (कुछ खाली पीली लिख डालो )
शिकार नम्बर 3 अनुराग श्रीवास्तव (पानी में कितने बताशे ?)
शिकार नम्बर 4 पंकज बेंगाणी ( डॉन को पकडना तो...)

शिकार नम्बर 5 नीलिमा (ये भी रिसर्च टॉपिक हो सकता है क्या ?)

और अंत में ,जब रचना ने खेल ज़रा सा बदल दिया तो मैं भी क्यों नहीं । तो मेरे पाँच सवाल ;-

पहला ; अपने जीवन की सबसे धमाकेदार ,सनसनीखेज वारदात बतायें ( अगर ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो कपोल कल्पना भी चलेगी ,सिर्फ ऐसी कल्पना के अंत में एक स्माईली अनिवार्य )

दूसरा ; चिट्ठा जगत में भाईचारा , बहनापा सच है या माया है ?

तीसरा ; किसी एक चिट्ठाकार से उसकी कौन सी अंतरंग बात जानना चाहेंगे ?

चौथा ; ईश्वर को हाज़िर नाज़िर जान कर बतायें (गीता/कुरान पर भी हाथ रख कर बता सकते हैं ) टिप्पणी का आपके जीवन में क्या और कितना महत्त्व

पाँचवा ;चिट्ठा लिखना सिर्फ छपास पीडा शांत करना है क्या ? आप अपने सुख के लिये लिखते हैं कि दूसरों के (दुख के लिये ;-)

20 comments:

Pankaj Bengani said...

इ का है?

आपने टेग तो कर लिया है.. अब लिखें क्या अपने ब्लोग पर?? गाइड तो किजीए. ये पकडा पकडी शुरू कब से हुई? :)

संजय बेंगाणी said...

आपकी पाँचवी बात जानकर संतोष हुआ की दुनियाँ में हम ही बेसुरे नहीं हैं :)

Amit said...

खूब प्रत्यक्षा जी, सही लिखा। लेकिन यह खेल काहे बदला जी, यह तो गलत बात है। बेचारे शिकारों को इतना मत फ़ांसो जी, उनको कुछ तो हक दो कि वे बेचारे अपनी इच्छा से अपने राज़ खोल सकें। जब आपको हमने इतनी छूट दी तो वही छूट आगे भी पॉसऑन होनी चाहिए!! :)

आशीष said...

अईयो अमको भी लपेट दिया जे ! अम जरूर लिकेगा, जल्दी लेकिगा जे !

masijeevi said...

बच्‍दा कहा अच्‍छा किया।
पर आपने टैग किए गए लोगों के लिंक क्‍यों नहीं दिए। लोग आसानी से आपके शिकारों से रूबरू हो पाते।

indiaroad said...

बहके हुए समय में हर तरह की बहक क्षम्‍य है. फिर हम तो हम तो हिंदुस्‍तानी संगीत वाले लोग हैं. धीरे-धीरे महफि़ल में उतरते हैं. आपकी गुत्थियां भी धीरे-धीरे खुलेंगी. बहकती रहा कीजिये.

अनूप शुक्ला said...

बहुत खूब। सवाल तो धांसू है, शिकार भी जोरदार। अब आयेगा मजा!

उन्मुक्त said...

शिकार भी अच्छे और प्रश्न भी।

SHUAIB said...

आपके विचार और आपके बारे मे जान कर बहुत ख़ुशी हुई।

संजीत त्रिपाठी said...

आपको आप के ही नजरिए से देखना अच्छा लगा।
चलिए इन पांच सवालों के चक्कर में हम जैसे नवजात चिठ्ठाकार, पुराने चिठ्ठाकारों को थोड़ा ज्यादा अच्छे से जान-समझ पाएंगे!

अनुराग श्रीवास्तव said...

प्रत्यक्षा जी,

आपने तो एक बकबकइये को छेड़ दिया - आप की आज्ञानुसार अब मैं अपनी पकाऊ पोस्टें डालने वाला हूं. फिर सारे ब्लागर्स आपकी चौखट पर माथा टिकाएंगे कि प्रत्यक्षा जी इस बावले का नाम वापस ले लो, इसने तो लिख लिख कर हम सबको पका डाला.

खैर, उनसे आप निपटियेगा, हम चले अपनी पकाऊ पोस्ट तैयार करने.

:)

नीरज दीवान said...

बहुत खूब.. अब अगले पांच शिकार .. पांच के पच्चीस होंगे और पच्चीस के एक सौ पच्चीसवां.. एक सौ छब्बीस में मेरा नाम आएगा क्या?

हम ये कैसे मान लें कि आपको गाने का शौक है? कभी पॉडकास्ट कीजिए तो जानें.

Pratyaksha said...

शिकार लोग , जुट जाईये ज्यादा देर नहीं होनी चाहिये नहीं तो पेनाल्टी में पाँच सवाल और जुट जायेंगे

संजय , बेसुरों की दुनिया में आपका स्वागत है

मसिजीवी जी , पहले तो आपको ही शिकार बना रहे थे फिर छोड दिया । क्या रिवार्ड देंगे ?

अमित , हम तो अपने हिसाब से खेल खेलेंगे , कहोतो तुम्हें फिर टैग कर दें :-)

अनूप जी , उनमुक्त जी और शुएब , शुक्रिया शुक्रिया ।

इंडिया रोड , कौन सी गुत्थी ? क्या पता और उलझ जाये

संजीत , आपकी बारी भी आयेगी

नीरज , बेसुरा सुनना चाहते हो क्या :-)

rachana said...

प्रत्यक्षा जी, साँभा इश्टाइल और आपकी बातें पसँद आई.आपकी लिस्ट मे वो नाम देखकर मजा आया जिन्हे मै बमुश्किल छोड पाई थी खासकर खालीपीली और अनुराग जी का! और इन लोगों से ऐसे सवाल पूछे जाने थे जिनके उत्तर मजे के हों, एसा करने मे थोडा हिचकिचाह्ट थी इसलिये मैने उन्हे अगली बारी के लिये छोड दिया था. लेकिन आपने उन्हे नामित किया है तो अब आयेगा मजा!!

Shrish said...

नछतर माड़ा चाल रह्‍या सै दिक्खै आज, सबेर लोग इन होया तो कै देक्खूं कि तीन-तीन लोगां नै मैरे तै टैग कर राक्ख्या सै।

बकरे की नानी कद लग खैर मनावागी, लिक्खैं सैं भाई दो एक दिनां म्ह। याड़ै बिजली की ब्‍होत परोबलम सै।

Shrish said...

ल्यो जी हाम नै अपणा पेपर लिख दिया। चौखे से नंबर दियो जी।

Vinic said...

Hi,

Yaar ye aag kisne lagai hain(pakda paki) jaha dekho isi ke charche hon rahe hai, kon kiska sikar, sab apne sath hue julm ka kisi aur se badla le rahe hai, apne Questions ki counting badate ja rahe hai, mast, I am enjoying a lot.

Hamesha ye blogs padta hoon but kabhi bhi comment nahi kiya, aaj to roka nahi gaya hath apne aap hi keyboard per chalne lage.

Sare log mazedaar jawab de rahe hai :))

Keep it up, isse mujhe bahut fayda hon gaya, sare blogs ke links mil gaye jo pahle dund dund kar pareshan hon gaya, ab to halat ye hai ki kisi ka bhi blog kholo who age 3-4 aur links de deta hai, mast game :) Sikahr and Sikhari :))

Vineet

मोहिन्दर कुमार said...

आपके जबाब तो लाजबाब थे ही.......सवाल भी कम नही.... उनके जबाब अवश्य ही राजनीति पूर्वक देने की आवश्यकता होगी.. हम भी कम
बेसुरे नही मगर हम ने हिम्मत की है अपनी आवाज अपने ब्लाग पर डालने की.... और चाहुंगा कि आप भी उसे झेलें

Hariraam said...

सचमुच, अदृश्य,अणाकार, अप्रत्यक्ष को भी प्रत्यक्ष करनेवाली प्रत्यक्षा लगती हैं आप

आशीष said...

ये लो जे , हमने अपने जवाब दे दिये हैं, दूकान का पता बदल गया है......
http://www.hindigram.org/index.php?option=com_content&task=view&id=15&Itemid=9

आशीष
खालीपीली वाला नये पते पर