1/25/2011

सफेद बगूले अपना आसमान


किसी दिन 
अभी सोचते किसी दिन
आयेगा कभी
जब सूरज लाल होगा 
और आत्मा दीप्त 
जब नदी बहेगी 
शरीर होगा मीठा तरल
शब्द संगीत होगा 
धूप होगी 
रात भी
तीन तरह के रंग होंगे
किसी के चेहरे पर आयेगा
बेतरह प्यार
उसके जाने बिना
जानना होगा 
कि अब भी 
खिलता है एहसास
जबकि लगता था 
इतनी हिंसा 
इतनी बेईंसाफी 
इतना घाव
इतने दंश 
सोख कर 
भूल जाती आत्मा
ओह ज़रूर भूल जाती होगी 
आत्मा अपनी आत्मा

1/17/2011

तोपखाँ का तैमूर

वो न देखी तस्वीर सरन को हौंट करती है । रात कई बार सपने में काठ की सीढ़ियाँ आहिस्ता आहिस्ता फूँक फूँक कर चढ़ते , रेलिंग टटोलते सरन ऊपर पहुँचती है । नीले अँधेरे में दरवाज़ा धकेलती बिलास के कमरे में साँस रोके घुसती है । खोजती है वही किताब यहाँ वहाँ । बिलास सोया रहता है । खोजती है बेचैनी में । मुड़ती है देखती है बिस्तर पर बच्चे सी भोली नीन्द में डूबा चेहरा सरन का है । ओह अपने ही सपने में ऐसी सेंधमारी । सरन शर्मिन्दा होती है । दिन में कई बार उसे लगता है ओ बी एस साहब मुझे देखोगे तो मेरे भीतर झाँक पाओगे ? जान पाओगे मेरी जिज्ञासा को ? ये कैसी आँख की किरकिरी है मेरी , बताओ तो ..
धूप की चकमक में रात का सब सोचा गुना कितना व्यर्थ लगता है । ऐसी चकमक रौशनी हो तो भीतर का अँधेरा भी पुछ जाये । सरन के मुँह में लेकिन राख भरा है । इरा चिबिल चिबिल इधर उधर होते देखती है थोड़ी निस्संग जिज्ञासा से ।
ओ लड़की सुधर जाओ ज़रा , बाबुन की संगत का ही असर हो कहीं या फिर
 इसके आगे सोच को लगाम देती इरा सब झटक कर खिली धूप में बाबुन के संग निकल पड़ती है ।
बाबुन एक बार बिलास की तरफ देखता है , फिर जाने किस दीवार खिड़की को बताता है , कोई झरना है , कहीं साफ पानी इकट्ठा होता है , मछलियाँ देखी जा सकती हैं , और अगर कोई जादू जानो तो एकाध फँस भी सकती हैं ।
 बिलास सिगरेट सुलगाते ,चाय की कप में राख झाड़ते , जाने किस कैमरे के कौन से पुर्जे को साफ करता बुदबुदाता है
अरे ओ तोपखाँ , देखेंगे हम भी 
बाबुन के बाल सीधे खड़े हैं । सरन तीन बार पानी से भिगाकर कँघी कर चुकी है । इरा हर बार जाने कहाँ से नमूदार होकर उसके बालों को हथेलियों से बिगाड़ बिखरा कर फिर जाने कहाँ गायब हो जाती है ।

रावी तुम मुझे पानी में खेलने तो दोगी न ? न रावी ?
बाबुन बार बार इरा के कुर्ते को खींचता है ।
 रावी तुम सुन नहीं रही , नहीं तो मैं अपने कछुये को डाल आऊँगा वहाँ , तुम देखती रहना
 इरा बेध्यान है ।
डाल आना , शायद कुछ  भला हो कमबख्त का , कोई जोड़ीदार ही मिल जाये उसे वहाँ
 सरन चीखती है
 खबरदार बाबुन , ऐसा कुछ किया तो , मर जायेगा तुम्हारा तैमूर लंग । एक पैर के कछुये को देखा है कभी आपने ?
 सरन बिलास को मुखातिब है ।
बिलास कहता है
 परिवारिक मसलों में शायद मुझे नहीं पड़ना चाहिये । वैसे तैमूर लंग को सीवियर साईकियाट्रिक प्रॉब्लम है ।
 तैमूर लंग इन सब बातों से बेखबर मेज़ पर अपने मैराथन में जुटा है ।

(ऊपर डेरेक मकक्रिया के खूबसूरत कछुआ साहब , हमारे प्यारे तैमूर लंग और बाकी सब किसी जाने कब लिखी जाने वाली लम्बी कहानी , किसी नोवेला की दर्प भरी पर भोली उम्मीद आकांक्षा रखने वाले टेक्स्ट का नन्हा हिस्सा )

1/15/2011

संगत संगीत

राई कूडर ने क्यूबा के उन संगीतकारों को , जो फिदेल की क्यूबा में गुमनामी के गर्त में खो गये थे, रिसरेक्ट किया है फिल्म् बूयेना विस्ता सोशल क्लब में .. कॉम्पे सेगुंडो, इब्राहिम फेरर, रूबेन गोंज़ालेज़, एलियाडे ओचोबा, ओमारा पोर्तुओन्दो .. लिस्ट लम्बी है और उनका संगीत अचंभित कर देने वाला ..
कहते हैं हवाना में संगीत मनोरंजन नहीं है , ये जीने का तरीका है
बूयेना विस्ता हवाना का वो प्रसिद्ध लोकप्रिय क्लब था जहाँ चालीस के दशक में दिग्गज संगीतकारों का जमघट लगता था । लगभग पचास वर्ष बाद क्लब बंद हुआ । विम वेंडर्स और राई कूडर ने उस गुज़रे ज़माने को इस फिल्म में उसी उल्लास से कैद किया है । पारंपरिक क्यूबन और लातिन अमरीकी संगीत का जादू हवाना की सड़कों और मकानों से होता घरों के भीतर से गुज़रता इन संगीतकारों की ज़बानी अपनी सहज कहानी कहता , संगीत की धूप खिली रंगत की खुशी से नहाता सराबोर करता है ।
घनी आबादी वाले हवाना के मरियानो इलाके में सिर्फ सदस्यों के लिये बना था ये सोशल क्लब । फिल्म की शुरुआत में राई कूडर और कॉम्पे सेगुंडो फिल्म के क्रू के साथ जब स्थानीय लोगों से क्लब का लोकेशन पूछते हैं तो किसी को मालूम नहीं निश्चित कहाँ था क्लब। ऐसे समय में जब अफ्रोक्यूबंस के खिलाफ नस्लीय भेदभाव संस्थागत था उस समय ऐसे क्लब किसी सामुदायिक गिल्ड की तर्ज़ पर या जिसे वहाँ कबिल्दो कहते थे , लोगों के एकसाथ मिल बैठने के अड्डे थे ।
रूबेन गोंज़ालेज़ जो क्लब में तीस और चालीस के दशक में पियानो बजाते थे , चालीस के दशक का वर्णन करते कहते हैं
  "an era of real musical life in Cuba, where there was very little money to earn, but everyone played because they really wanted to".
ये वही समय था जब जैज़ से प्रभावित संगीत माम्बो , चरांगा और पचाँगा और चा चा जैसी नृत्य शैलियों का विकास हुआ । एक तरीके से ऐफ्रो-क्यूबन संगीत शैली जैसे रँबा और सोन का निरंतर विकास होता रहा । आर्सेनियो रॉड्रीगेज़ ने एक नये इंस्ट्रूमेंट की मदद से इस संगीत को तब्दील किया सोन मोंतुनो में , जिसे क्यूबन संगीत का आधार कहा जाता है और जिसका बहुत गहरा प्रभाव बीसवीं सदी की न सिर्फ लातिन अमरीकी बल्कि अमरीका के संगीत पर भी पड़ा । सोन क्यूबन लोकप्रिय संगीत का एक ज़ानर है जिसमें स्पैनिश गिटार और अफ्रीकी बांटू रिद्म और परकशन के तत्व हैं ।
खैर , राई कूडर ने इस अल्बम को मात्र छह दिन में रिकार्ड किया और इसमें चौदह ट्रैक्स थे , चैन चैन से लेकर आखिर में ला बायेमेसा और बाद में विम वेंडर्स के साथ मिलकर ड्क्यूमेंटरी बनाई जो कि खुद् उनके अनुसार
"It felt like it was a true character piece"
अच्छे संगीत और बच्चे सी सहजता और भोलेपन वाली खुशी के साथ इन संगीतकारों को गाते बजाते देखना चाहे वो अम्स्टरडम हो या न्यूयॉर्क , हर बार ऐसा ही लगता है जैसे अपने मुहल्ले के आत्मीय संसार में अपने में लीन वो संगीत रच रहे हैं और इस सिलसिले में अगर कुछ लोग वहाँ जुट कर आपके संगीत को सराह दें , बस इससे ज़्यादा और खुशी क्या चाहिये ।
संगीत का मीठा नशीला खुमार जो किसी भी सर्द दिन में हमारी छाती में धूप भर दे जैसे ये  चैन चैन