11/06/2006

ज़ायका

ये है छुट्टी के दिन का नाश्ता ! अब कहें मुँह में पानी आया कि नहीं ?

नाश्ता

(अब कैमरा नया नया होगा तो ऐसी ही तस्वीरें खींची जायेंगी न :-)

20 comments:

संजय बेंगाणी said...

हमारी भूख तो यह छवि देखते ही भड़क उठी. बड़ी मुश्किल से वापस बैठाया है.
अतं में कौन सा कैमरा लिया आपने?

RCMishra said...

नाश्ता अच्छा है, फोटो और भी अच्छी है!
इस प्रकार के विषय (Object) के लिये अलग कोण से भी प्रयास करें...
संजय जी पता चला कि कैमरा Sony का है।

उन्मुक्त said...

यदि कहूं कि मुंह में पानी नहीं आया तो वह झूट होगा।

Punit Pandey said...

vaise hi itni bhookh lag rahi hai aur upar se blogger log aise photo aur chapne lage. kya dushmani hai bhai.

भुवनेश शर्मा said...

मुंह में पानी तो आ गया
पर इसे पार्सल कर देतीं तो मजा भी आ जता

आशीष said...

तस्वीर अच्छी है ! और नास्ता तो क्या कहने !

मै चला अमूल पार्लर नाश्ता करने !

प्रियंकर said...

बहुत खराब बात है प्रत्यक्षा बहुत खराब बात . इस तरह के फोटो दे कर ललचाना बहुत खराब बात है. अब ये तस्वीरें कई चिट्ठाकारों के सपनों मे आकर डिस्को करेंगी --उन्हें बेचैन और परेशान करेंगी -- अवचेतन मन पर असर पड़ेगा और नए तरह के मनोवैज्ञानिक दबावों की सृष्टि होगी .
भोजन बाधा रोग के नए रोगियों की संख्या बढेगी. लार बहाने वाले बच्चों के साथ अब लार बहाने वाले पिता भी डॉक्टरों के पास जाते दिखाई देंगे .
चिट्ठाकारों की पत्नियां जो बकौल अनुराग और जीतू पहले से ही अपने पतियों के चिट्ठा संबंधी संदिग्ध आचरण को लेकर परेशान और आशंकित हैं उन
पर क्या गुजरेगी जब पति लोग उन पर ऐसा और वैसा नाश्ता बनाने के लिए जोर-जबर्दस्ती करेंगे. अब तक दुनिया भर में इस तस्वीर के कई रंगीन प्रिंट आउट निकल चुके होंगे .जो दीवार पर चिपके होंगे उन्हें तो पत्नियां नोच कर फ़ेंक देंगी पर जो आत्मा पर चिपक गए हैं उनका क्या होगा.वे तो अपना दुष्परिणाम दिखायेंगे ही. इससे घरेलू हिंसा बढने का भी खतरा है.इधर एक नया कानून बना है जिसके मुताबिक पत्नी से यह कहना कि नाश्ता या खाना अच्छा नहीं बना है उसे मानसिक प्रतारणा देना माना जाएगा . कहीं इस तस्वीर के पीछे किसी उग्र स्त्रीवादी संगठन का जाल तो नहीं .

सावधान चिट्ठाकार बंधुओ! सावधान!

एक बात और . जब भी सुस्वादु भोजन संबंधी कोई चर्चा हो (यहां तो मात्र फोटो है) तो ये ब्राह्मण ब्रिगेड (मिश्रा,पांडेय,शर्मा,पालीवाल आदि आदि) इतनी सक्रिय क्यों हो जाती है. कोई 'जेनेटिक डिसऑर्डर' है क्या ?

masijeevi said...

गनीमत है कि आपने इस नाश्‍ते की योजना पहले से ब्‍लॉगित नहीं की थी वरना माउस कसम हम तो सर पर एक्‍सीलेटर रख गुड़गांव पहुँच ही जाते यूँ भी रोहिणी से है ही कितना दूर

आपकी कहानी पढ़ी ज्ञानोदय में। बधाई

अनूप भार्गव said...

विज्ञान नें तरक्की तो की है लेकिन इतनी भी नहीं कि इन में कुछ को 'ईमेल' के साथ 'अटैचमेन्ट' की तरह भेजा सके .....

अनूप शुक्ला said...

किसी दूसरे (?)की मेज पर लगा नास्ता देखकर फोटो खींचना तो ठीक है समझ में आता है लेकिन मुंह में पानी और लालच करना घोर पाप है. ऐसा ही बनाना सीखकर तब आनंद उठाओ. वैसे भी जो नास्ता खाये जाने ज्यादा फोटो खिचाने लायक हो उसके बनाने वाले कुछ दिन और ट्रेनिंग लेनी चाहिये.है कि नहीं!

Udan Tashtari said...

है क्या क्या, कैसे बनाया रेसिपी वगेरह तो बता दें. कम से कम खुद ही बना कर खा लेंगे.

Udan Tashtari said...

है क्या क्या, कैसे बनाया रेसिपी वगेरह तो बता दें. कम से कम खुद ही बना कर खा लेंगे.

Anonymous said...

हे भगवान यहाँ तो पहले से ही इतने लोग लार टपकाये कतार में खड‌े हैं ;)

Tarun said...

हे भगवान यहाँ तो पहले से ही इतने लोग लार टपकाये कतार में खड‌े हैं ;)

Pratyaksha said...

सबसे पहले तो चूल्हे कडछी को हाज़िर नाज़िर जान कर बयान दे दें कि खाना मेरे ही हाथों पकाया गया और जितना अच्छा देखने में है उतना ही स्वादिष्ट खाने में भी ।(संतोष और बच्चों ने तो यही कहा , आखिर आगे भी उन्हें खाना खाना है या नहीं )

संजय , कैमरे , मिश्र जी ने सही कहा , सोनी है , और आगे भी अलग अलग कोण के फोटो आपको दिखाये जायेंगे ।

उनमुक्त , पुनीत , भुवनेश , आशीष ,तरुण तरीफ के लिये शुक्रिया ( भले ही फोटो की हो )

प्रियंकर :-)))))

अनूप जी , आप अगली बार आयें ,पाककला के नमूने आप पर भी आजमाये जायेंगे

फुरसतिया जी , तरीफ तो कर देते, फोटो की ही सही

मसीजिवि , अरे आईये न गुडगाँव कभी , मैं सचमुच अच्छा खाना पकाती हूँ \

समीर जी , रेसिपी भी बताई जायेगी , थोडा सब्र करें

राकेश खंडेलवाल said...

जो भी है भर कर प्लेट मेम रखा मेज पर सामने
लेकिन भूख अभी वैसी है जैसी दी थी राम ने

masijeevi said...

Jab aapne tippani (kahani par)maang hi li hai to theek hai.
pehle to kshama chnki college ke system se log in kiya hai isliye roman mein hi likhna padega.

Tareef mujh jaise khadoos master ki kalam se msuhkil se nikalti hai isliye pehle yeh mushkil kaam kar leta hun- kahani khubsurat hai visheshkar antardwandva ke chitran mein. jaari rahiye....

Kintu....jaise hi antardwandva samapta hota hai achchha rehta kahani bhi sampapt ho jati. kripya tulna karein Prabha khetan ki atmakatha ke uss ansh ke saath jismein ve lagbhag si stithi mein apne (non-premi) ke saath hain - Hans ka is baar ka anka..)

kripya na apni kalam ko viraam dein na kadchhee aur kadhaai ko aur na hi camera ko.

DR PRABHAT TANDON said...

प्रत्यक्षा जी,
मेरे लिये कुछ बचा है कि यह भुक्कड खा-पी कर और डकार मार कर चले गये।

Anonymous said...

खाना बनाना, और सजाना दोनो ही कला हैं। आप दोनो में निपुण लगती है ( फ़ोटो खींचने के साथ साथ )।

मुझे खाना बना और फ़ोटो खींचनी दोनो ही पसंद है। कुछ अपनी इजाद की हुई पाक विधियाँ भी है। क्या आप को भेजी जा सकती हैं ?

Pratyaksha said...

बिलकुल भेजी जा सकती हैं । लेकिन अब आप अज्ञात से ज्ञात तो हो जायें ।