6/22/2005

तो तुम आये थे

रात भर ये मोगरे की
खुशबू कैसी थी
अच्छा ! तो तुम आये थे
नींदों में मेरे ?

6 comments:

आलोक said...

मोगरे यानी?

Pratyaksha said...

मोगरा.. एक खुशबूदार फूल.....अभी कोशिश की मोगरे के बारे में नेट पर कुछ खोजने की...सिर्फ गुलज़ार की लिखी "आपकी आँखों में....लब हिलें तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं ..." मिला...
काफी है ???

PrashantSoni said...

soya tha main chadar tan kar,
khwab dekha tha ik pari ka;

adhkhili muskan usake chehare par thi,
vismay aur hasi usake labon par thi.
badalo ke gaddon par, neelee chunari ko oodhi,
na janata tha tu hi thi mere khyalo main doobi...

PrashantSoni said...

badhai ho, nirantar ki samasya poorti ,(may ank) me jeet ki..

Dhananjaya Sharma said...

इतने कम शब्दों में इस मानवीय भाव को हिन्दी कविता के द्वारा बहुत सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के लिए, आपको बधाई !

उसी भाव को आगे बढ़ाने के दिशा में मेरा यह प्रयास है । अपने विवाह-पूर्व दिनों को याद करते हुए, अपनी पत्नी गीता को यह कविता समर्पित कर रहा हूँ । आशा करता हूँ कि यह विस्तार सभी का मन-भावन होगा ।

होता रहा रात भर, एक रेश्मी छुअन का अहसास ।
अच्छा ! तो तुम आये थे नीदों में मेरे पास ?

जागने के बाद भी, होते रहे मीठे मेरे जज़बात ।
अच्छा ! तो तुम आये थे सपनों में मेरे, कल रात ?

अब तो मुश्किल है दिन का गुजारना, और इन्तज़ार है, कि कब होए रात ।
हो सकता है कि सपना कभी हकीकत बन जायें, और रहो तुम हमेशा मेरे पास, हर दिन और हर रात ॥

- धनञ्जय शर्मा
०२।०७।२००५

Pratyaksha said...

प्रशांत जी और धनंनजय जी....पहले तो शुक्रिया कविता के भाव को सराहने के लिये..पर उससे भी ज्यादा ..उसका जवाब इतने सुंदर मोती सी लडी से शब्दों में देने के लिये...
बहुत सुंदर ..आप दोनों ने लिखा...इसी तर्ज़ पर कुछ और पोस्ट करूँगी..
प्रत्यक्षा